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बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है

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Crypto Crash Today: बिटकॉइन, डोज़कॉइन समेत बड़ी करेंसीज़ क्यों हुई क्रैश?

नई दिल्ली. आज क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में बड़ी गिरावट आई है. इस गिरावट की एक बड़ी वजह है. दरअसल, क्रिप्टो एक्सचेंज बिनांस (Binance) ने एक कल दूसरी एक्सचेंज FTX के ‘लिक्विडिटी की समस्या’ का हल देने के लिए उसकी गैर-अमेरिकी यूनिट को पूरी तरह खरीदने की घोषणा की है. FTX और बिनांस एक दूसरे की प्रतिद्वद्वी एक्सचेंज थीं.

बिनांस के सीईओ चांगपेंग ज़ाओ (Changpeng Zhao) ने मंगलवार सुबह ट्वीट किया कि एफटीएक्स (FTX) में “एक बड़ा लिक्विडिटी संकट है” और एफटीएक्स द्वारा बिनांस की मदद मांगने के बाद, उन्होंने “एक गैर-बाध्यकारी LoI पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य FTX.com को पूरी तरह से हासिल करना और तरलता की कमी के संकट को दूर करना है.”

निवेशकों में डर का माहौल

लिक्विडिटी की समस्या की खबर आने के बाद से ही क्रिप्टो में निवेश करने वालों के बीच एक चिंता का विषय बना हुआ है. ज्यादातर निवेशकों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दरों के बीच क्रिप्टो से अपना पैसा निकालना ही बेहतर समझा है. यही वजह है कि क्रिप्टोकरेंसी बाजार भी काफी अधिक टूट चुका है.

इस डील की खबर आने के बाद हालांकि बड़ी क्रिप्टोकरेंसीज़ में कल, मंगलवार, को काफी तेजी देखी देखने को मिली, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई. आज खबर लिखे जाते समय (10:17 बजे) तक क्रिप्टोकरेंसी बाजार का सबसे बड़ा कॉइन 7.23 फीसदी गिरकर 18,275.85 डॉलर पर ट्रेड हो रहा था. पिछले 7 दिनों के भीतर इसमें 10.91 फीसदी की गिरावट आई है.

इसी तरह दूसरा सबसे बड़ा सिक्का Ethereum (ETH) भी पिछले 24 घंटों के दौरान 11.27 फीसदी टूटकर 1,306.07 डॉलर पर आ चुका है. पिछले 7 दिनों में इसमें 17.75 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है.

क्या है अन्य कॉइन्स का हाल?

यदि ग्लोबल क्रिप्टो मार्केट कैप (Global crypto market cap) की बात करें तो पिछले 24 घंटों में यह 7.24 गिरकर 908.20 बिलियन डॉलर रह चुकी है. इस बीच ज्यादा टूटने वाले कॉइन्स में मार्केट लीडर बिटकॉइन और इथेरियम तो हैं ही, साथ ही XRP, Cardano, Dogecoin, Shiba Inu, और Solana में भी तगड़ी गिरावट आई है.

हाल ही में ट्विटर को खरीदने वाले एलन मस्क द्वारा बार-बार समर्थन प्राप्त करने वाले Dogecoin (DOGE) की हालत काफी खराब है. पिछले 24 घंटों में यह 14.56 प्रतिशत गिरा है, जबकि पिछले 7 दिनों में यह 40.29 फीसदी तक गिर चुका है. XRP आज 10.27 फीसदी तो पिछले 7 दिनों में 15.58 फीसदी गिरा है. Shiba Inu (SHIB) में पिछले 24 घंटों में 8.16 फीसदी तो पिछले 7 दिनों में 21.63% की गिरावट आई है.

बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है

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Bitcoin is the first digital currency, created back in 2009. Bitcoin is one of the most volatile and popular instruments among cryptocurrencies.

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आदिवासी पहचान और अस्मिता का संकट

आदिवासी पहचान और अस्मिता का संकट

“आदिवासी पहचान और अस्मिता”आज भी आदिवासियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है, जो एक बार फिर से जोर पकड़ने लगा है. विगत दिनों आदिवासी
विकास परिषद् की रांची में हुए वार्षिक अधिवेशन में मांग की गई कि संविधान का संशोधन करते हुए आदिवासियों के लिए प्रयुक्त “अनुसूचित जनजाति”
के जगह पर “आदिवासी” शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. आदिवासी पहचान और अस्मिता का प्रश्न भारत में एक लंबे अरसे से विवाद का विषय
रहा है. आदिवासी डंके के चोट पर दावा करते हैं कि वे भारत के प्रथम निवासियों के वंशज होने के नाते देश के इंडिजिनस पीपुल्स और मालिक हैं,
जिन्हें भारत सरकार और संघ परिवार न सिर्फ खारिज करते हैं, बल्कि मुख्यधारा में लाने के नाम पर उन्हें “वर्ण एवं जाति” व्यवस्था का हिस्सा बनाने हेतु कई दशक
से प्रयासरत हैं. फलतः आदिवासी अपनी मूल पहचान, भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज एवं परंपरा से बेदखल हो रहे हैं.

आदिवासी पहचान और अस्मिता के मसले को समझने के लिए हमें इतिहास को खंगालना होगा. ब्रिटिश हुकूमत के समय आदिवासियों के लिए एबोरिजिनल,
नेटिव एवं ट्राईबल शब्दों का प्रयोग किया जाता था. लेकिन भारत की आजादी के बाद से लेकर अबतक सरकारी दस्तावेजों में आदिवासियों के लिए सिर्फ
शेड्यूल्ड ट्राईब, ट्राईबल एवं अनुसूचित जनजाति शब्दों का ही उपयोग होता है. गैर-सरकारी तौर पर भी आदिवासी शब्द से परहेज करते हुए
उन्हें कोल, जंगली, गिरिजन, वनवासी, वनबंधु इत्यादि कहा जाता है तथा आदिवासी शब्द को एक षड्यंत्र के तहत “असभ्य, जंगली एवं नीच” के तौर पर
चित्रित किया गया है, ताकि आदिवासी अपमानित महसूस करते हुए अपनी मूल बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है पहचान और दावेदारी छोड़ दें.

इसी कड़ी में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने आदिवासियों को “वनवासी, आदिवासी बोली, जीववाद, आदिम व्यवसाय, मांसभक्षी, नंगा या
अर्द्धनग्न रहना, खानाबदोश, मद्यपान एवं नृत्य में लीन रहने वाले लोग” के रूप में परिभाषित किया था तथा 1997 में भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के
विशेष कार्यदल के सामने आदिवासी अस्तित्व को नकारते हुए कहा था कि हमारे यहां इंडिजिनस पीपुल्स नहीं रहते हैं. इसी तरह संघ परिवार आदिवासी इलाकों
में अभियान चलाकर आदिवासियों के मन-मस्तिष्क में “वनवासी” शब्द डाल रहा है, ताकि वे आदिवासी शब्द को भूलते हुए भारत के प्रथम निवासी होने का
दावेदारी छोड़ देंगे, जिसे आर्य लोग स्वयं को देश का असली निवासी घोषित कर सकेंगे. लेकिन सरकार और संघ परिवार के ठीक विपरीत 5 जनवरी 2011
को सुप्रीम कोर्ट ने “कैलाश एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र सरकार” के मसले पर फैसला सुनाते समय स्पष्ट कहा कि आदिवासी ही भारत के प्रथम निवासी और मालिक

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मौलिक तौर पर देखें तो “आदिवासी” का शाब्दिक अर्थ है आदिकाल से निवास करने वाले लोग. यह अंग्रेजी शब्द “एबोरिजिनल” का हिन्दी रूपांतरण है,
जो मूलतः दो शब्दों “आदि” एवं “वासी” से मिलकर बना है. आदिवासी, एबोरिजिनल एवं इंडिजिनस पीपुल्स उन लोगों को कहा जाता है, जिनका किसी
भौगोलिक क्षेत्र से ज्ञात इतिहास में सबसे पुराना सम्बन्ध रहा हो. यही वजह है कि ब्रिटिश हुकूमत ने आदिवासियों के लिए “एबोरिजिनल” शब्द का प्रयोग किया
और जब इसके हिन्दी रूपांतरण की जरूरत पड़ी तब “आदिवासी” शब्द का प्रयोग हुआ, जिसे 1930 के दशक में आदिवासी मुद्दों को उठाते समय ए.वी. ठक्कर ने प्रचलित किया तथा 1940 के दशक में आदिवासी महासभा ने इसे देशव्यापी बनाया.

आदिवासी पहचान और अस्मिता पर सबसे बड़ा प्रहार डॉ. भीमराव अम्बेदकर बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है ने किया. 1 दिसंबर 1948 को संविधान सभा में डॉ. अम्बेडकर ने संशोधन सं.
491 के द्वारा भारतीय संविधान का मसौदा अनुच्छेद 13 के उप-अनुच्छेद 5 में रखे गये “एबोरिजिनल” शब्द को हटाकर उसके एवज में “शेडयूल्ड”
शब्द का प्रस्ताव रखा. जब इसके बारे में मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को पता चला, तब वे आग बबुला हो गये. 2 दिसंबर 1948 को उन्होंने संविधान सभा
में सवाल उठाते हुए कहा कि डा. अम्बेडकर ने “एबोरिजिनल” शब्द के एवज में “शेडयूल्ड” शब्द का प्रस्ताव क्यों दिया है? उन्होंने जोर देते हुए कहा
कि हम आदिवासी हैं और हमें हमारे लिए आदिवासी के अलावा कोई दूसरा शब्द नहीं चाहिए. इस पर डा. अम्बेडकर ने जवाब देते हुए कहा कि “आदिवासी”
शब्द एक सामान्य शब्द है, जिसका कोई कानूनी अर्थ नहीं है. जबकि इसका विशेष अर्थ है. यदि आज संविधान में “आदिवासी” शब्द होता तो भारत
सरकार को मजबूर होकर अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन का कॉन्वेंशन 169 एवं संयुक्त राष्ट्र का आदिवासी घोषणा पत्र को लागू करना पड़ता, जिससे
आदिवासियों की पहचान, स्वायत्तता, संस्कृति, जमीन, इलाका और प्राकृतिक संसाधन संरक्षित हो जाते.
मानवशास्त्र एवं समाजशास्त्र हमें बताते हैं कि नस्ल एवं जाति दोनों अलग-अलग हैं. आदिवासी लोग नस्लीय समूह से आते हैं इसलिए उनका सरोकार “वर्ण एवं
जाति” व्यवस्था से दूर-दूर तक नहीं है. बावजूद इसके उन्हें सरकारी कार्यों के लिए “जाति प्रमाण पत्र” प्रस्तुत करना पड़ता है, जो आदिवासियों के
मूल पहचान को मटियामेट करने हेतु किये गये संगठित प्रयास का नतीजा है. लेकिन अफसोस की बात यह है कि जयपाल सिंह मुंडा के बाद किसी आदिवासी नेता ने इसे राष्ट्रीय फलक पर नहीं उठाया.

आदिवासियों का अपना अलग रंग-रूप, वेश-भूषा, भाषा, संस्कृति, परंपरा, रिवाज, जमीन, इलाका और प्राकृतिक संसाधन है, जो उन्हें “वर्ण एवं जाति” व्यवस्था
से अलग पहचान देते हैं.इसलिए उनके मांग के अनुरूप उनकी मूल पहचान और अस्मिता को स्वीकार करते हुए भारतीय संविधान के मसौदा में उल्लेखित
“एबोरिजिनल” एवं “आदिवासी” शब्द को संविधान में पुनः स्थापित करना चाहिए.

दरअसल शब्दों के इस्तेमाल के सांस्कृतिक और सभ्यतागत मूल्य है. भारत जैसे विशाल और बहुलतावादी समाज में शब्दों के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किए जाने की जरूरत है. किसी भी समूह और समुदाय को समानता और न्याय का बोध तभी होता है, जब उसके सभ्यतागत मूल्यों को सत्ता आत्मसात करती है. आदिवासी समाज की विशष्टता, पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए जरूरी है कि उसे सामाजिक मूल्यगत शब्दावली से उच्चारित किया जाए.

डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं.

What Is Bitcoin? | बिटकॉइन क्या है क्यों इतना प्रसिद्ध है

What Is Bitcoin

Bitcoin एक डिजिटल मुद्रा है जो Cryptocurrency की श्रेणी में आती है | Bitcoin दुनिया की सबसे पहली Cryptocurrency है। यह पहली डिजिटल मुद्रा है जिसका अर्थ है ना यह किसी बैंक द्वारा बनाई गई और ना ही इसे किसी बैंक द्वारा कंट्रोल किया जाता । इसकी बुनियाद कम्प्यूटर नेटवर्किंग पर रक्खी गई है इसका लेनदेन सिर्फ और सिर्फ कम्प्यूटर नेटवर्किंग द्वारा किया जा सकता है । यह वर्चुअल करेंसी है जिसे आप आम करेंसी की तरह छू नहीं सकते | इसका आविष्कार सातोशी नकामोतो नाम के एक इन्सान ने 2008 में किया था |

महत्वपूर्ण तथ्य | important facts

Table of Contents

जैसे की Bitcoin मुद्रा Digital System से बनाई गई इसलिए यह मुद्रा Digital wallet में ही रखी जाती है। इसकी शुरुआत 3 जनवरी 2009 को हुई थी। यह दुनिया का पहला खुला भुगतान सिस्टम है। दुनिया भर में 1 करोड़ से ज़्यादा बिटकॉइन हैं। बिटकॉइन एक वर्चुअल मुद्रा है, (मतलब कि अन्य मुद्रा की तरह इसका कोई ऐसा रुप नहीं है जिसे आप देख सके या छू सके यह एक डिजिटल करेंसी है।) यह केवल डिजिटली स्टोर होती है। अगर किसी के पास बिटकॉइन है तो वह उसे सेल करके उसे फिजिकल करेंसी (यानी एक आम मुद्रा में बदल सकता है) में कन्वर्ट कर सकता है ।

मौजूदा समय की बात करे तो पूरी दुनियाँ में बिटकॉइन बहुत लोकप्रिय हो रहा है | वर्तमान में लोग कम कीमत पर बिटकॉइन खरीद कर ऊँचे दामों पर बेच कर कारोबार कर रहे हैं।

इसके अलावा और भी कई ऐसी वजह है जिससे बिटकॉइन लोकप्रिय होता जा रहा है, जैसे ; किसी अन्य क्रेडिट कार्ड की तरह इसमें कोई क्रेडिट लिमिट नहीं है न बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है ही कोई नगदी लेकर घूमने की समस्या है। इसके अलावा यह सुरक्षित और तेज है जिससे लोग बिटकॉइन स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं।

और इसकी कोई सीमा भी नहीं है। खरीदार की पहचान का खुलासा किए बिना पूरे बिटकॉइन नेटवर्क के प्रत्येक लेन देन के बारे में पता किया जा सकता है। Bitcoin इतना लोकप्रिय होने का एक बड़ा कारण यह भी क्योंकि Bitcoin पर किसी सेंट्रल बैंक, व्यक्ति, सरकार, या कम्पनी, का कोई किसी तरह का कब्जा या कन्ट्रोल नहीं है |

Use Of Bitcoin | बिटकॉइन का इस्तेमाल

अमेरिका जैसे देशो में कुछ कम्पनी और वेबसाइट है जो बिटकॉइन भुगतान स्वीकार करती | हर साल दुनिया में लगभग $1 से लेकर 1 मिलियन डॉलर तक Bitcoin से लेनदेन हो जाता है। लेकिन इंडिया की बात करें तो जैसे डेबिट कार्ड क्रेडिट कार्ड UPI से आप भुगतान करते है ऐसे बिटकॉइन से भुगतान करना इंडिया में अभी ना के बराबर आप मान सकते है |

इसके दो बड़े कारण है 1 Bitcoin या कोई भी क्रिप्टोक्रेसी अभी लोगो के बीच इतनी आम नहीं हुई है 10,000 लोगो में से किसी एक पास मिलेगी | 2 बिटकॉइन को प्रोसेसिंग के बाद भुगतान पूरा होने में 20 से 30 मिनट तक लग जाते है, वही डेबिट कार्ड क्रेडिट कार्ड UPI से भुगतान प्रोसेस पूरा होने में कुछ सेकंड लगते है | लेकिन हो सकता है आने वाले कुछ सालो में बिटकॉइन से भुगतान करना आम हो जाए

एक आकड़े के अनुसार साल 2010 से 2017 तक लोगों ने बिटकॉइन में पैसा निवेश करके काफी मुनाफा कमाया है । वैसे सबकी अपनी-अपनी किस्मत होती है लेकिन जो हमने आंकड़े बताए है इनसे प्रभावित होकर निवेश ना करे | आपनी सोच समझ का इस्तेमाल करके इन्वेस्ट करे नहीं तो आपको बहुत नुक्सान उठाना पड़ सकता है

Bitcoin Mining क्या है (What is Bitcoin Mining in Hindi)

What is Bitcoin Mining

बिटकॉइन माइनिंग का काम दो प्रकार से होता है एक बिटकॉइन के लेनदेन को वेरी फाई करना दूसरा नए बिटकॉइन का निर्माण करना

पहले बिटकॉइन लेनदेन की बात करते है | सारे बिटकॉइन ट्रांज़ैक्शन का एक पब्लिक खाता होता है जिसे LEDGER कहते है डिजिटल फॉर्म में आप ऐसा समझलो जितने कम्प्यूटर सिस्टम बिटकॉइन नेटवर्क से जुड़े है उन सब सिस्टम पर हर एक ट्रांज़ैक्शन की एक कॉपी होती है जो लोग ये सिस्टम चलाते है उनेह माइनर्स कहते है, माइनर्स का काम ट्रांज़ैक्शन को वेरी फाई करना होता है |

अगर A को B के अकाउंट में 2 बिटकॉइन भेजने है माइनर्स को कन्फर्म करना पड़ेगा क्या A वाले पर्सन के खाते में 2 बिटकॉइन है या नहीं ट्रांज़ैक्शन कन्फर्म करने के लिए माइनर्स को एक मैथमैटिक प्रोसेस करना होगा हर एक ट्रांज़ैक्शन का एक यूनिक वेरिएबल होता है माइनर्स का काम इसे ढून्ढ कर निकालना और ये काम बिटकॉइन सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर से ऑटोमेटिक होता है,

इसके लिए जो कम्प्यूटर इस्तेमाल किया जाता है वह हाई प्रोसेसर और पावरफुल कम्प्यूटर होते है जब यह मैथमैटिक प्रोसेस पूरा हो जाता है तो बिटकॉइन नेटवर्क कम्प्यूटर उसे कन्फर्म करते है और ये ट्रांज़ैक्शन चैन में एड़ हो जाती है ट्रांज़ैक्शन का एक ब्लॉक बन जाता है इसलिए इस टेक्नोलॉजी का नाम ब्लॉकचैन है

नए बिटकॉइन “माइनिंग” नाम के एक कॉम्पिटिटर और डिसेंट्रलाइज प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न होते हैं। इस प्रक्रिया में शामिल है कि व्यक्तियों को उनकी सेवाओं के लिए नेटवर्क द्वारा पुरस्कृत किया जाता है। बिटकॉइन माइनर्स विशेष हार्डवेयर का उपयोग करके लेनदेन को संसाधित कर रहे हैं और नेटवर्क को सुरक्षित कर रहे हैं और बदले में नए बिटकॉइन एकत्र कर रहे हैं।

बिटकॉइन प्रोटोकॉल को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि नए बिटकॉइन एक निश्चित दर पर बनाए जाते हैं। यह बिटकॉइन माइनिंग को एक बहुत ही प्रतिस्पर्धी व्यवसाय बनाता है। जब अधिक माइनर्स नेटवर्क में शामिल होते हैं, तो लाभ कमाना कठिन हो जाता है और माइनर्स को अपनी परिचालन लागत में कटौती करने के लिए दक्षता की तलाश करनी चाहिए।

किसी भी केंद्रीय प्राधिकरण या डेवलपर के पास अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए सिस्टम को नियंत्रित या हेरफेर करने की कोई शक्ति नहीं है। दुनिया में हर बिटकॉइन नोड उन नियमों का पालन नहीं करने वाली किसी भी चीज को अस्वीकार कर देगा, जो सिस्टम से पालन करने की अपेक्षा करता है।

बिटकॉइन घटती और अनुमानित दर पर बनाए जाते हैं। प्रत्येक वर्ष बनाए गए नए बिटकॉइन की संख्या स्वचालित रूप से समय के साथ आधी हो जाती है जब तक कि बिटकॉइन जारी करना पूरी तरह से 21 मिलियन बिटकॉइन अस्तित्व में नहीं है। इस बिंदु पर, बिटकॉइन माइनर्स को विशेष रूप से कई छोटे लेनदेन शुल्क द्वारा समर्थित किया जाएगा।

बिटकॉइन का मूल्य क्यों है? | Why do bitcoins have value?

बिटकॉइन का मूल्य है क्योंकि वे पैसे के रूप में उपयोगी हैं। बिटकॉइन में भौतिक गुणों (जैसे सोना और चांदी) या केंद्रीय अधिकारियों (जैसे fiat मुद्राओं) पर भरोसा करने के बजाय गणित के गुणों के आधार पर धन (स्थायित्व, सुवाह्यता, प्रतिरूपता, कमी, विभाज्यता और पहचान) की विशेषताएं हैं। संक्षेप में, बिटकॉइन गणित द्वारा समर्थित है।

इन विशेषताओं के साथ, मूल्य धारण करने के लिए धन के रूप में जो कुछ भी आवश्यक है वह है विश्वास । बिटकॉइन के मामले में, इसे इसके उपयोगकर्ताओं, व्यापारियों और स्टार्टअप के बढ़ते आधार से मापा जा सकता है। सभी मुद्रा की तरह, बिटकॉइन का मूल्य केवल और सीधे उन लोगों से आता है जो उन्हें भुगतान के रूप में स्वीकार करने के इच्छुक हैं।

बिटकॉइन की कीमत क्या निर्धारित करती है? What determines bitcoin’s price?

बिटकॉइन की कीमत आपूर्ति और मांग से निर्धारित होती है। जब बिटकॉइन की मांग बढ़ती है, तो कीमत बढ़ जाती है, और जब मांग गिरती है, तो कीमत गिर जाती है। प्रचलन में केवल सीमित संख्या में बिटकॉइन हैं और नए बिटकॉइन एक अनुमानित और घटती दर पर बनाए जाते हैं, जिसका अर्थ है कि कीमत को स्थिर रखने के लिए मांग को मुद्रास्फीति के इस स्तर का पालन करना चाहिए।

क्योंकि बिटकॉइन अभी भी एक अपेक्षाकृत छोटा बाजार है, जो कि हो सकता है, यह बाजार मूल्य को ऊपर या नीचे ले जाने के लिए महत्वपूर्ण मात्रा में पैसा नहीं लेता है, और इस प्रकार बिटकॉइन की कीमत अभी भी बहुत अस्थिर है |

फेड की चेतावनी पर मिला-जुला स्टॉक, संपत्ति पर चीन चढ़ा

सिडनी, 14 नवंबर (Reuters) – अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा निवेशकों को मुद्रास्फीति की संख्या से पहले चेतावनी देने के बाद सोमवार को एशियाई शेयरों में मिला-जुला रहा, जबकि चीनी शेयरों में देश के पस्त संपत्ति क्षेत्र के लिए मदद के संकेत मिले।

अमेरिकी मुद्रास्फीति में एक मामूली चूक दो साल के कोषागार पर डॉलर को लगभग 4% खोने के लिए पर्याप्त थी, सप्ताह के लिए 33 आधार अंक नीचे – 50 साल पहले फ्री-फ्लोटिंग विनिमय दरों के युग के बाद से चौथी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट।

हालांकि, फेडरल रिजर्व ने अमेरिकी वित्तीय स्थितियों के परिणामी सहजता का पूरी तरह से स्वागत नहीं किया, गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने कहा कि बैंक को ब्रेक से बाहर निकालने के लिए नरम बयानों की आवश्यकता होगी। अधिक पढ़ें

वालर ने कहा कि बाजार मुद्रास्फीति की धुरी पर खुद से आगे निकल रहे थे, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि फेड अब धीमी गति से लंबी पैदल यात्रा के बारे में सोचना शुरू कर सकता है।

फ्यूचर्स दिसंबर में 4.25-4.5% की अर्ध-बिंदु दर पर अधिक दांव लगा रहे हैं, फिर 4.75-5.0% की सीमा में दो-तिमाही-बिंदु शिखर।

दो साल की उपज शुक्रवार को 4.29% तक गहरी गोता लगाने के बाद बढ़कर 4.42% हो गई।

जेपी में आर्थिक अनुसंधान के प्रमुख ब्रूस गैसमैन ने कहा, “नकारात्मक सीपीआई आश्चर्य वैश्विक मुद्रास्फीति में मंदी की ओर इशारा करते हुए संकेतकों की एक विस्तृत श्रृंखला के अनुरूप है, जो फेड और अन्य जगहों पर मौद्रिक नीति की गति में कमी को प्रोत्साहित कर सकता है।” मॉर्गन।

“इस सकारात्मक संदेश को इस मान्यता से शांत किया जाना चाहिए कि मुद्रास्फीति में कमी का मतलब है कि केंद्रीय बैंक काम की घोषणा करने के लिए बहुत कम होंगे, और यह और अधिक सख्त होने की संभावना है।”

MSCI का जापान के बाहर एशिया-प्रशांत शेयरों का सबसे बड़ा सूचकांक (.MIAPJ0000PUS) पिछले सप्ताह 7.7% बढ़ने के बाद इसमें 1.1% की वृद्धि हुई।

जापान की निक्केई (.N225) दक्षिण कोरिया 0.8% गिरा (.KS11) फ्लैट गया। एसएंडपी 500 वायदा 0.3% और नैस्डैक वायदा 0.5% गिर गया।

EUROSTOXX 50 वायदा 0.4% बढ़ा, जबकि FTSE वायदा 0.1% बढ़ा।

चीन पर नजर

डीलर यह देखने के लिए भी इंतजार कर रहे थे कि क्या चीनी शेयर अपनी बड़ी रैली का विस्तार कर सकते हैं, प्रतिबंधों के साथ वित्तीय संस्थानों से तनावग्रस्त संपत्ति डेवलपर्स को अधिक सहायता प्रदान करने का आग्रह किया गया है। अधिक पढ़ें

चीन का रियल एस्टेट इंडेक्स (.CSI000952) प्रतिक्रिया में 5% की वृद्धि। नामी कंपनियां (.CSI300) चीन के कोविड प्रतिबंधों में कई बदलावों से 1.1% की वृद्धि में मदद मिली, क्योंकि देश ने सप्ताहांत में अधिक मामले दर्ज किए। अधिक पढ़ें

एफएक्स रणनीति के प्रमुख रे एड्रिल ने कहा, “आर्थिक दृष्टिकोण से मामले की खबर को नकारात्मक के रूप में देखना कठिन है, लेकिन यह गति का संकेत है, और बाजार खुशी से नो-बकवास, शून्य-कोविड रणनीति को अपना रहे हैं।” एनएबी में।

ताइवान, यूक्रेन और उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वाकांक्षाओं में रूस के युद्ध पर अमेरिकी चिंताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन पद ग्रहण करने के बाद पहली बार सोमवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे। अधिक पढ़ें

कोविड के नियमों की खबर ने युआन में शॉर्ट-कवरिंग उछाल शुरू कर दिया, जिससे डॉलर पर व्यापक दबाव बढ़ गया क्योंकि पैदावार गिर गई। युआन सोमवार को 1.4% मजबूत हुआ – 2005 के बाद से इस तरह का सबसे बड़ा कदम।

डॉलर इंडेक्स सोमवार को 106.920 पर था, लेकिन अभी भी पिछले हफ्ते के 111.280 से कम है।

यूरो पिछले सप्ताह 3.9% की वृद्धि के बाद 1.0308 डॉलर पर पहुंच गया, जबकि डॉलर पिछले सप्ताह के 5.4% की गिरावट के बाद 139.49 येन पर मजबूत हुआ।

स्विस नेशनल बैंक की चेतावनियों पर स्विस फ़्रैंक के मुकाबले डॉलर में गिरावट आई है कि वह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए दरों और मुद्रा खरीद का उपयोग करेगा। अधिक पढ़ें

गुरुवार को ब्रिटिश चांसलर के शरद ऋतु के बयान से पहले स्टर्लिंग $ 1.1755 पर लौट आया, जहां उनसे कर वृद्धि और खर्च में कटौती की उम्मीद की जाती है। अधिक पढ़ें

क्रिप्टोक्यूरेंसी दबाव में थी क्योंकि क्लाइंट फंड में कम से कम $ 1 बिलियन कथित तौर पर ढह गए क्रिप्टो एक्सचेंज एफटीएक्स से गायब हो गए थे। अधिक पढ़ें

बिटकॉइन 1.5% गिरकर 16,055 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले सप्ताह लगभग 22% गिर गया था।

डॉलर के हालिया रिट्रीट ने कमोडिटीज को बहुत जरूरी प्रोत्साहन प्रदान किया, पिछले हफ्ते 100 डॉलर से अधिक बढ़ने के बाद सोना 1,760 डॉलर प्रति औंस था।

तेल वायदा ने चीनी मांग बढ़ने की उम्मीद में अपना लाभ बढ़ाया, जिसमें ब्रेंट 28 सेंट बढ़कर 96.27 डॉलर हो गया, जबकि यू.एस. क्रूड 20 सेंट बढ़कर 89.16 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

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