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क्रिप्टो ब्रोकर क्या है?

क्रिप्टो ब्रोकर क्या है?

Buyer और Seller के बीच बगैर एक्सचेंज क्रिप्टो ट्रांजेक्शन पर 1% TDS लगेगा, जानिए इसे कैसे डिडक्ट करना होगा

CBDT ने फिर से स्पष्ट किया है कि पीयर-टू-पीयर ट्रांजेक्शन में TDS का डिडक्शन किस तरह से होगा। पियर-टू-पियर ट्रांजेक्शन एक्सचेंज के बाहर होने वाला ट्रांजेक्शन है। इसमें बायर को सेलर को पेमेंट करने से पहले TDS डिडक्ट करना होगा

वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) के ट्रांसफर पर आपको 1 जुलाई से 1 फीसदी TDS चुकाना होगा। जब बायर (Buyer)क्रिप्टोकरेंसी का पेमेंट सेलर (Seller) को करेगा तो TDS जरूरी होगा। इस साल फरवरी में पेश बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने क्रिप्टोकरेंसी के ट्रांसफर पर टीडीएस का ऐलान किया था। CBDT ने इस बारे में 22 जून को सर्कुलर जारी किया था।

इस सर्कुलर में CBDT ने यह स्पष्ट किया था कि TDS डिडक्ट करने की जिम्मेदारी बायर, एक्सचेंज या ब्रोकर पर होगी। अब CBDT ने फिर से स्पष्ट किया है कि पीयर-टू-पीयर ट्रांजेक्शन में TDS का डिडक्शन किस तरह से होगा। पियर-टू-पियर ट्रांजेक्शन एक्सचेंज के बाहर होने वाला ट्रांजेक्शन है। इसमें बायर को सेलर को पेमेंट करने से पहले TDS क्रिप्टो ब्रोकर क्या है? डिडक्ट करना होगा।

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अगर ट्रांजेक्शन एक्सचेंज के जरिए होता है तो TDS काटने की जिम्मेदारी एक्सचेंज पर होगी। सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बायर को यह सुनिश्चित करना होगा कैश में या किसी चीज (Kind) में या कुछ कैश में और कुछ Kind में पेमेंट से पहले TDS डिडक्ट कर लिया जाए।

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे बायर्स पर टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा। टैक्स कंसल्टिंग फर्म AKM ग्लोबल के टैक्स पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, "पहले आए सर्कुलर में पीयर-टू-पीयर ट्रांजेक्शन के मामले में TDS काटने के बारे में साफ तौर पर नहीं बताया गया था। नए सर्कुलर में यह कमी दूर कर ली गई है। अगर ट्रांजेक्शन एक्सचेंज के बाहर होता है तो बायर और सेलर दोनों के लिए कंपलायंस बढ़ जाएगा। इसमें बायर को कंपलायंस का ध्यान रखना होगा।"

कंपलायंस बढ़ने का मतलब यह है कि बायर और सेलर को पहले TDS कैलकुलेट करना होगा। फिर, उसे डिडक्ट करना होगा। इसके अलावा उसे TDS का अमाउंट टैक्स डिपार्टमेंट के पास डिपॉजिट भी करना होगा।

माहेश्वरी ने कहा, "हालांकि, बायर और सेलर को TDS डिपॉजिट करने के लिए सेक्शन 194S के तहत TAN के लिए अप्लाई नहीं करना होगा। लेकिन नॉन-फर्निशिंग ऑफ पैन से जुड़े कंपलायंस का पालन सेक्शन 206AA के तहत करना होगा। यह भी कि अगर सेक्शन 194S के तहत एक बार विदहोल्डिंग हो जाता है तो किसी दूसरे सेक्शन के तहत फिर से विदहोल्डिंग की जरूरत नहीं होगी।"

अगर ट्रांसफर कैश की जगह Kind (किसी चीज) में होता है तो बायर और सेलर दोनों को टैक्स चुकाना होगा और VDA के एक्सचेंज से पहले एक दूसरे को इसका प्रूफ दिखाना होगा। दोनों को जरूरी कंपलायंस और फाइलिंग का भी पालन करना होगा।

क्या है पीयर-टू-पीयर ट्रांजेक्शन?

कोई ट्रांजेक्शन जो सीधे बायर और सेलर के बीच होता है, जिसमें कोई इंटरमीडियरी शामिल नहीं होता है, उसे पीयर-टू-पीयर ट्रांजेक्शन कहते हैं। इंटरमीडियरीज का मतलब एक्सचेंज या ब्रोकर से है।

एक्सचेंज का मतलब क्या है?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, 'एक्सचेंज' का मतलब ऐसे व्यक्ति से है, जो VDA के ट्रांसफर के लिए कोई एप्लिकेशन या प्लेटफॉर्म ऑपरेट करता है। यह एप्लिकेशन बाय और सेल ट्रेड को मैच कराता है और उसे पूरा कराता है। ज्यादातर एक्सचेंजों और क्रिप्टो ऐप्स ने अपने क्लाइंट्स को इस रूल के बारे में बता दिया है।

क्रिप्टो के एक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म ZebPay ने अपने सदस्यों को बताया है, "टैक्स से जुड़े प्रस्तावित नियम के लागू होने की तारीख को ध्यान में रख हम अपने प्लेटफॉर्म में बदलाव कर रहे हैं।" उसने कहा है कि ZebPay ट्रेड एग्जिक्यूट होने के समय 1 फीसदी TDS काट लेगा। यह नियम 1 जुलाई से लागू हो जाएगा। फिर बायर की तरफ से TDS सरकार के पास जमा कर दिया जाएगा। आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के वक्त इसे अपनी टैक्स लायबिलिटी के साथ एडजस्ट कर सकते हैं।

ZebPay के मुताबिक आपके ट्रांजेक्शन पर TDS का असर इस तरह पड़ेगा:

अगर आप एक बिटकॉइन का सेल ऑर्डर 20,00,000 रुपये पर देते हैं:

ऑर्डर वैल्यू=20,00,000 रुपये ट्रांजेक्शन फीस* (20,00,000 का 0.25%) = 5,000 रुपये TDS (19,95,000 का 1%) = 19,950

फाइनल कैलकुलेशन (एक्चुअल विड्रॉल अमाउंट)=20,00,000-(5,000+19,950) =19,75,050* ट्रांजेक्शन फीस में अतर हो सकता है, जो आपसे संबंधित टियर पर डिपेंड करती है

MoneyControl News

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First Published: Jun 30, 2022 6:03 PM

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क्रिप्टो करेंसी के कारोबार को भारत में मिल सकती है मंजूरी

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2 नवंबर को क्रिप्टोकरेंसी के प्रमुख कारोबारियों के साथ मीटिंग की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को RBI और अन्य से इस संबंध में मीटिंग की है। ऐसा माना जा रहा है कि भारत में क्रिप्टो करेंसी को शर्तों और नियमों के साथ मंजूरी मिल सकती है।

2 नवंबर को बुलाई गई बैठक में RBI के वरिष्ठ अधिकारी, क्रिप्टो के तीन एक्सचेंज के अधिकारी, क्रिप्टो ब्रोकर और इंडिया टेक आदि के अधिकारी शामिल हुए। इन सभी ने क्रिप्टो पर एक व्हाइट पेपर तैयार किया था। चीन में भले ही क्रिप्टो पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा है, पर भारत में कुछ नियंत्रण और शर्तों के साथ इसे मंजूरी मिल जाएगी। इस बैठक में KYC फ्रेमवर्क और अवैध लेन-देन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

वैसे अब केवल बिटकॉइन ही नहीं, हजारों क्रिप्टो करेंसी हैं। यदि क्रिप्टो की आपूर्ति बढ़ती रहती है, तो कुछ स्तर पर यह मॉनिटरी पॉलिसी के लिए चुनौती भी हो सकती है। इंडस्ट्री में कई लोग चाहते हैं कि क्रिप्टो करेंसी को केवल भारत में जो एक्सचेंज हैं, उनसे ही खरीदा जाए। बैंकों की तरह इन एक्सचेंज को FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के लिए 74% तक की अनुमति दी जानी चाहिए। क्रिप्टो की आड़ में फंड के आदान-प्रदान पर भारत के बाहर भी कई रेगुलेटर्स के द्वारा आवाज उठाई गई है।

इंडस्ट्री यह चाहती है कि क्रिप्टो को करेंट असेट के रूप में वर्गीकृत (क्लासीफाई) किया जाए न कि मुद्रा के रूप में। ताकि इसे आसानी से नकदी में बदला जा सके। साथ ही उद्योग यह भी उम्मीद करता है कि सरकार और RBI कुछ अन्य मुद्दों पर छाए संशय के बादल को साफ करे।

इसमें प्रमुख बातों में यह है कि क्या इससे हुए फायदे को कैपिटल गेन या बिजनेस इनकम मानकर इस पर टैक्स लगाया जाना चाहिए। क्या विदेशी एक्सचेंज और अन्य विक्रेताओं से क्रिप्टो खरीद में होने वाली धांधली विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम का (फेमा) का उल्लंघन होगा और क्रिप्टो को कौन रेगुलेट करेगा? चूंकि भारत में फाइनेंशियल रेगुलेटर कई हैं। जैसे बीमा के लिए IRDAI, म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के लिए सेबी तथा बैंकिंग और अन्य पेमेंट के लिए रिजर्व बैंक। इसलिए यह अभी तय नहीं है कि इसे कौन रेगुलेट करेगा।

क्रिप्टो की कीमतों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव है। उदाहरण के तौर पर पिछले 24 घंटे में हुस्की नामक करेंसी की कीमत 67 हजार% बढ़ी हैं। इससे इसका मार्केट कैप 1.5 अरब डॉलर हो गया है। इससे पहले SQUID, शिबा और कोकोस्वैप की कीमतें भी इसी तरह से बढ़ी हैं।

एक्सचेंजों का कहना है कि वे खरीदार और विक्रेता से मेल कराने के लिए सिर्फ एक मंच हैं। क्रिप्टो की खरीद और सप्लाई नहीं करते हैं। वर्तमान नियमों के तहत, अगर कोई विदेश से सिक्के लाकर अपने देश में बेचता है तो इसका आसानी से पता लगाना संभव नहीं है।

दरअसल 3 नवंबर को कई संगठनों और क्रिप्टो के कारोबारियों ने मिलकर एक अंग्रेजी समाचार पत्र में दो फूल पेज विज्ञापन दिया था। इसमें यह दावा किया था करोड़ों भारतीयों ने क्रिप्टो में 6 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। इसका रेगुलेशन किया जाता है। रेगुलेशन में इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IMAI) और अन्य हैं जो सेल्फ रेगुलेटरी बॉडी हैं। इस पर एडलवाइस म्यूचुअल फंड की सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा कि फाइनेंशियल असेट्स को IMAI नहीं रेगुलेट कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह पता नहीं है कि निवेशक बेस और सही साइज इंडस्ट्री की क्या है। अगर यह 6 लाख करोड़ रुपए का निवेश है तो इसे बहुत जल्दी से रेगुलेट किया जाना चाहिेए।

दो दिन पहले ही केंद्र सरकार ने देश में अवैध तरीके से चल रहे सभी क्रिप्टो एक्सचेंज पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकियों के लिए टेरर फंडिंग और काला धन जमा करने वालों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया बने इन क्रिप्टो एक्सचेंज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए कहा है। शनिवार को PM ने इसे लेकर फाइनेंस मंत्रालय, RBI और गृह मंत्रालय के साथ एक बैठक की। बैठक में PM मोदी ने स्पष्ट तौर पर पूछा कि क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलराइज करने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं। यह तय किया गया कि क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर युवाओं को गुमराह करने वाली अपारदर्शी एडवर्टाइजिंग पर रोक लगाई जाए।

दो दिन पहले ही RBI गवर्नर शक्तिकांत क्रिप्टो ब्रोकर क्या है? दास ने डिजिटल करेंसी को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने इसे बेहद गंभीर विषय बताया था और जल्द ही कोई बड़ा कदम उठाए जाने की तरफ इशारा किया था। क्रिप्टोकरेंसी क्रिप्टो ब्रोकर क्या है? पर शिकंजा कसने के लिए RBI और शेयर बाजार रेगुलेटर सेबी मिलकर एक फ्रेमवर्क तैयार कर रहे हैं।

गिरावट के बाद भी युवाओं को Cryptocurrency पर भरोसा, स्टॉक मार्केट में नहीं लगाना चाहते पैसा

cryptocurrency bitcoin: बिटकॉइन (bitcoin) मई 2016 में 523 डॉलर का था जो अब 35 हजार डॉलर पर है. अभी कुछ दिन पहले 65 हजार डॉलर पर गया था, लेकिन चीन में पांबदी और एलॉन मस्क के ट्वीट ने इसका बेड़ागर्क कर दिया. फिर भी 2016 की तुलना में यह बहुत आगे है.

गिरावट के बाद भी युवाओं को Cryptocurrency पर भरोसा, स्टॉक मार्केट में नहीं लगाना चाहते पैसा

एनर्जी कंजप्शन को लेकर चाइनीज सरकार भी काफी गंभीर है. पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने पिछले महीने क्रिप्टो सर्विसेज पर बैन की घोषणा की. उसके बाद बिटक्वॉइन, इथेरियम जैसी डिजिटल करेंसी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी. भारत सरकार भी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ है. RBI मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने फिर कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर रिजर्व बैंक अपने रुख पर कायम है और वह इसके खिलाफ है.

TV9 Bharatvarsh | Edited By: Ravikant Singh

Updated on: May 31, 2021 | 3:03 PM

भारत में क्रिप्टोकरंसी (cryptocurrency) की राह बहुत मुश्किल है. बिटकॉइन, इथीरियम, पोलीगॉन या डोजकॉइन जैसी डिजिटल करेंसी न तो वैध है और न ही उसे अवैधा माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके इस्तेमाल को हरी झंडी दी है, लेकिन रिजर्व बैंक इसे वैध बनाने को तैयार नहीं है. ऐसे में भारत में क्रिप्टोकरंसी का बाजार अधर में लटका है. cryptocurrency में निवेश की जहां तक बात है तो भारत किसी भी अन्य देश से पीछे नहीं है. यहां कई निवेशक ऐसे हैं जिन्होंने दुनिया में नाम कमाया और क्रिप्टो की दुनिया में परचम लहरा दिया.

एक आंकड़े पर गौर करें तो भारत में 15,000 करोड़ रुपये क्रिप्टोकरंसी पर लगा है. निवेश करने वालों की तादाद 1.5 करोड़ के आसपास है. साइबर करेंसी में पैसा लगाने वाले इन 1.5 करोड़ लोगों में ज्यादातर युवा हैं. सरकार जब तक क्रिप्टोकरंसी को हरी झंडी नहीं दे देती, तब तक इन निवेशकों में बिजनेस का भरोसा नहीं आएगा. हमेशा एक डर बना रहेगा कि क्या पता कल होके क्रिप्टो को मंजूरी न मिले और जो धंधा अभी चल रहा है, वह भी चौपट हो जाए. मगर इनमें कई युवा निवेशक ऐसे हैं जिन्हें भरोसा है कि क्रिप्टो के बाजार में 100 फीसद खरा उतरेंगे और उनका धंधा टकाटक चमकेगा.

युवाओं की पसंद

इनमें एक हैं मीत शाह जो 15 साल की उम्र से क्रिप्टो की खरीद-बिक्री करते हैं. 2012 में जब लोग कम ही क्रिप्टो के बारे में जानते थे, मीत शाह तब क्रिप्टो कॉइन के साथ खेलना शुरू कर चुके थे. देश के सबसे पुराने एक्सचेंज जेबपे में उन्होंने 300 रुपये लगाकर बिटकॉइन (bitcoin) की खरीदारी की. 300 रुपये लगाकर मीत शाह आज 65,000 रुपये से ज्यादा का निवेश कर चुके हैं. उनका मानना है कि कोई भी क्रिप्टोकरंसी (cryptocurrency) इतने कम दिन में ऐसा रिटर्न नहीं दे क्रिप्टो ब्रोकर क्या है? सकती.

शाह बताते हैं कि उन्होंने खेल-खेल में बिटकॉइन खरीद लिया था, लेकिन आज यह बात नहीं है. तब बिटकॉइन अभी स्टार्ट ही हुआ था. शाह जैसे कई लोग हैं जिन्होंने बेमन या मजाक में बिटकॉइन, इथीरियम और लोटकॉइन जैसी साइबर करंसी खरीद ली हो. आज जिस तेजी से इन क्रिप्टोकरंसी के दाम बढ़ रहे हैं, इसका अंदाजा लगाना उनके लिए भी मुश्किल है.

बिटकॉइन के धंधे में तेजी

बिटकॉइन (bitcoin) मई 2016 में 523 डॉलर का था जो अब 35 हजार डॉलर पर है. अभी कुछ दिन पहले 65 क्रिप्टो ब्रोकर क्या है? हजार डॉलर पर गया था, लेकिन चीन में पांबदी और एलॉन मस्क के ट्वीट ने इसका बेड़ागर्क कर दिया. फिर भी 2016 की तुलना में यह बहुत आगे है. क्रिप्टोकरंसी की इस तेजी को देश के युवाओं ने पकड़ा और आज वे अच्छा लाभ कमा रहे हैं.

युवाओं की बात सुनें तो पता चलेगा कि जैसे लॉटरी में लोग पैसा लगाते थे, आज युवा क्रिप्टो में पैसा लगाते हैं. उनका मानना है कि रिटर्न आए तो ठीक नहीं तो पैसा डूबने वाला नहीं है. भारत में आज 70 परसेंट निवेशक 30 साल से नीचे के हैं. ये युवा ऐसे हैं जो अपने को स्टॉक मार्कट में नहीं खपा सकते. उनका मानना है कि स्टॉक की जानकारी नहीं, एनालिसिस भी नहीं कर सकते और रिसर्च की बात तो दूर है. ब्रोकर बनकर निवेश करना तो और भी टेढ़ी खीर है.

स्टॉक में पैसे लगाना मुश्किल

स्टॉक और फंड की तुलना में इन युवाओं को क्रिप्टो एक्सचेंज में पैसे लगाना ज्यादा सुविधाजनक लगता है. भारत के युवा क्रिप्टोकरंसी (cryptocurrency) के लिए जेबपे, वजीरएक्स, बिनेंस, कॉइनबेस और क्रैकेन के जरिये पैसा लगाते हैं. युवाओं को ये एक्सचेंज आसान और ओपन सोर्स होने के चलते निवेश के लिए सही लगते हैं. इस बीच इंटरनेट कंप्यूटर नाम की नई क्रिप्टोकरंसी आ गई जिसने पूरे बाजार को बदल कर रख दिया. इंटरनेट कंप्यूटर ने क्रिप्टो की बड़ी-बड़ी कंपनियों को चुनौती दे दी है. यह कंपनी अब लोगों को खुद की क्रिप्टोकरंसी (cryptocurrency) माइनिंग करने और उसे बेचकर कमाने का मौका दिया है. इसका नया आइडिया लोगों को इतना पसंद आया कि रातों रात कंपनी 45 अरब डॉलर पर पहुंच गई.

इथीरियम और इथर में फर्क

इन सबके बीच इथीरियम (ethereum) का उदाहरण सबसे चौंकाने वाला है. इथीरियम ब्लॉकचेन का नाम है जबकि उसकी डिजिटल करंसी इथर है. आज की तारीख में इथीरियम अपने ब्लॉकचेन से ज्यादा कमाई करती है न कि इथर से. इथीरियम ब्लॉकचेन पर नॉन फंजीबल टोकन का बिजनेस भी होता है. इथीरियम आज लोगों को एक साथ कई तरह का धंधा करने का विकल्प दे रहा है. इन सबके बावजूद क्रिप्टोकरंसी का धंधा अभी बहुत ज्यादा खुला और बिना डर का नहीं है. जानकार मानते हैं कि इसमें पैसा लगाएं लेकिन सावधानी के साथ.

अब क्रिप्टो ब्लॉकचेन बनाने का काम जोरों पर है जिससे क्रिप्टोकरंसी में बाढ़ वाली स्थिति आ गई है. लोगों को पता नहीं चल रहा कि किसमें पैसा लगाना सही है और किसमें नहीं. इससे भी क्रिप्टोकरंसी का बाजार मंदा पड़ रहा है. जानकार बताते हैं कि जब तक क्रिप्टोकरंसी बैध न हो जाए, तब तक फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है.

Cryptocurrency: दुनिया में सबसे अधिक 10.07 करोड़ क्रिप्टोकरेंसी यूजर्स भारत में हैं-रिपोर्ट

Cryptocurrency मालिकों की संख्या के मामले में भारत शीर्ष पर है

भले ही भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) की निगरानी के लिए विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन फिर भी देश में बिटकॉइन (Bitcoin) समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों का क्रेज बना हुआ है। ब्रोकर डिस्कवरी और कंपैरिजन प्लेटफॉर्म BrokerChooser के अनुसार, क्रिप्टो मालिकों की संख्या के मामले में भारत शीर्ष पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कानूनी अस्पष्टता के बावजूद दुनिया में क्रिप्टो मालिकों की संख्या सबसे अधिक 10.07 करोड़ भारत में है।

पिछले 12 महीनों में कुल ग्लोबल सर्चेज, क्रिप्टो मालिकों की संख्या, ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स और अन्य क्रिप्टो ब्रोकर क्या है? फैक्टर्स के आधार पर भारत फिलहाल 7वां सबसे ज्यादा क्रिप्टो अवेयर (crypto-aware) देश है। क्रिप्टो मालिकों के मामले में अमेरिका 2.74 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि इसके बाद रूस (1.74 करोड़) और नाइजीरिया (1.30 करोड़) का स्थान है।

BrokerChooser की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय लोगों में क्रिप्टो के संबंध में जागरूकता को लेकर किए गए इस अध्ययन में दुनिया के 50 देशों को शामिल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिप्टो अवेयरनेस स्कोर में भारत ने 10 में से 4.39 अंक हासिल किए। भारत ने इस मामले में ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया। भारत कुल क्रिप्टो सर्चेज की संख्या (लगभग 36 लाख) के मामले में दूसरे स्थान है, जबकि अमेरिका इस मामले में पहले नंबर पर है।

आपको बता दें कि भारत सरकार देश में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक खास प्लान बना रही है। मोदी सरकार ने संसद में क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल पेश करने का फैसला लिया है। हालांकि इस विधेयक के बारे में जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं है। यह विधेयक देश में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को कानूनी रूप से नियंत्रित करेगा।

वर्तमान में, Bitcoin और अन्य क्रिप्टोकरेंसी भारत में कानूनी दायरे से बाहर हैं। हालांकि उन्हें अवैध नहीं कहा जा सकता है क्योंकि वे अभी तक देश में किसी भी केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा उपयोग के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। क्रिप्टोक्यूरेंसी फिलहाल किसी भी दिशा-निर्देश, विनियम या नियम के दायरे से बाहर है। इस वजह से Bitcoin और altcoin लेनदेन जोखिम भरा है क्योंकि इन एक्सचेंजों से उत्पन्न होने वाले विवाद कानूनी रूप से बाध्य नहीं होंगे।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) ने हाल ही में कहा था कि केंद्रीय बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrencies) को लेकर अपनी चिंताओं से सरकार को अवगत करा दिया है। अब सरकार को इसपर गौर करना है। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार को यह तय करना है कि ऐसे प्लेटफार्मों के प्रसार से कैसे निपटा जाए।

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