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4. विद्युत वित्त निगम (शृंखला VI) वित्त वर्ष 2022-23

पीएसयू बैंकों की सुधरेगी हालतः सरकार देगी 88,000 करोड़ रुपये की पूंजी

By: एजेंसी | Updated at : 24 Jan 2018 09:35 PM (IST)

नई दिल्लीः सरकार ने आज पूंजी की कमी से जूझ रहे सार्वजनिक क्षेत्र (पीएसयू) के 20 बैंकों में 88,139 करोड़ रुपये की पूंजी डालने का एलान किया है. इसमें सबसे ज्यादा 10,610 करोड़ रुपये की पूंजी आईडीबीआई बैंक को दी जायेगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उनके मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डालने को लेकर विस्तृत विचार विमर्श के बाद योजना तैयार की है.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 2.1 लाख करोड़ रुपये की नई पूंजी डालने की योजना का पिछले साल अक्तूबर बैंक पूंजी में एलान किया गया था. इस योजना का क्रियान्वयन दो वित्त वर्षों 2017-18 और 2018-19 में किया जायेगा.

जानें किस बैंक को कितनी मिलेगी पूंजी घोषणा के मुताबिक 31 मार्च को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय स्टेट बैंक को 8,800 करोड़ रुपये और बैंक आफ इंडिया को 9,232 करोड़ रुपये दिये जायेंगे. इसके अलावा यूको बैंक को 6,507 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे. पंजाब नेशनल बैंक को 5,473 करोड़ रुपये, बैंक आफ बड़ौदा को 5,375 बैंक पूंजी करोड़ रुपये, सैंट्रल बैंक आफ इंडिया को 5,158 करोड़ रुपये, केनारा बैंक को 4,865 करोड़ रुपये, इंडियन ओवरसीज बैंक को 4,694 करोड़ रुपये और यूनियन बैंक आफ इंडिया को 4,524 करोड़ रुपये दिये जायेंगे.

संकट! तीन साल में पहली बार बैंकों में फंड की कमी, आरबीआई ने दिए 22 हजार करोड़, कर्ज की मांग से बढ़ रहा दबाव

इस समय कर्ज और जमा की ग्रोथ रेट में करीब 6 फीसदी का अंतर चल रहा है.

इस समय कर्ज और जमा की ग्रोथ रेट में करीब 6 फीसदी का अंतर चल रहा है.

रिजर्व बैंक ने मंगलवार को बैंकिंग सिस्‍टम में करीब 22 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डाली और एक नए संकट को भी उजागर बैंक पूंजी किया. आर . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : September 21, 2022, 13:09 IST
आरबीआई ने मंगलवार को बैंकिंग सिस्‍टम में 21.8 हजार करोड़ की पूंजी भी डाली है.
यह मई, 2019 के बाद से बैंकों को दी गई सबसे बड़ी रकम है.
26 अगस्‍त को समाप्‍त सप्‍ताह में बैंकों के कर्ज बांटने की ग्रोथ रेट 15.5 फीसदी थी.

नई दिल्‍ली. जमा दर कम होने और कर्ज की मांग बढ़ने से बैंकों में फंड की कमी हो गई है. रिजर्व बैंक ने कहा है कि 40 महीने में पहली बार बैंकों के पास फंड की कमी आई है, जबकि बैंक पूंजी कर्ज की मांग लगातार बढ़ती जा रही है.

बैंकों को पूंजी मुहैया कराने के लिए आरबीआई ने मंगलवार को बैंकिंग सिस्‍टम में 21.8 हजार करोड़ की पूंजी भी डाली है. यह मई, 2019 के बाद से बैंकों को दी गई सबसे बड़ी रकम है. मुश्किल ये भी है कि इस समय ओवरनाइट रेट्स लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जबकि एक दिन का रेट बढ़कर 5.85 फीसदी पहुंच गया है, जो जुलाई 2019 के बाद सबसे ज्‍यादा है. ऐसे में बैंकों के पास फंड जुटाने के विकल्‍प भी महंगे होते जा रहे हैं.

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परिचय :

प्रबंधित किए गए सार्वजनिक मुद्दों का ट्रैक-रिकॉर्ड

केनरा बैंक भारत में अग्रणी ‘मर्चेंट बैंकरों/निवेश बैंकरों’ में से एक है, जो बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों, राज्य के स्वामित्व वाले निगमों, स्थानीय सांविधिक निकायों, एमएसएमई सहित कॉर्पोरेट क्षेत्र को पूंजी बाजार बैंक पूंजी से संबंधित विशेष सेवाएं प्रदान करता है।

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केनरा बैंक भारत में अग्रणी ‘मर्चेंट बैंकरों/निवेश बैंकरों’ में से एक है, जो बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों, राज्य के स्वामित्व वाले निगमों, स्थानीय सांविधिक निकायों, एमएसएमई सहित कॉर्पोरेट क्षेत्र को पूंजी बाजार से संबंधित विशेष सेवाएं प्रदान करता है।

आठ सरकारी बैंक मार्च तक बाजार से जुटाएंगे पूंजी

नयी बैंक पूंजी दिल्ली : सरकार के 2.11 लाख करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण योजना के हिस्से के रुप में सार्वजनिक क्षेत्र के आठ बैंकों (पीएसयू) ने चार महीने के भीतर बाजार से पूंजी जुटाने का फैसला किया है. आधिकारिक सूत्रों ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कुछ बैंकों को वित्त मंत्रालय से निजी नियोजन या राइट इश्यू के माध्यम से पूंजी जुटाने की मंजूरी मिल गयी है जबकि अन्य बैंक मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है.

सूत्रों ने कहा कि अधिकांश बैंक पूंजी जुटाने के लिए योग्य संस्थागत नियोजन मार्ग को पसंद कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) पहला बैंक होगा जो बाजार में पांच हजार करोड़ रुपये जुटाएगा. बैंक ऑफ बडौदा, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और आंध्र बैंक भी शेयर बिक्री के लिए तैयार हैं. फंसे कर्ज या अधिक एनपीए की समस्या के जूझ रहे बैंकों को मजबूत बनाने के लिए वित्त मंत्री अरण जेटली ने अक्तूबर महीने में बैंक पूंजी बैंक में दो साल में 2.11 लाख करोड़ रुपये डाले जाने की घोषणा की थी. एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) मार्च 2015 में 2.75 लाख करोड़ से बढ़कर जून 2017 में 7.33 लाख करोड रुपये हो गया था. सरकार की योजना सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 52 प्रतिशत पर लाने की है.

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