रणनीति विचार

एक Price Gap क्यों बनता हैं

एक Price Gap क्यों बनता हैं

4 प्रकार के प्राइस गैप जो एक ट्रेडर को पता होना चाहिए

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • Price Gaps सामान्य पैटर्न होते है जो डे ट्रेडर्स और पोजीशनल ट्रेडर्स दोनों के ही द्वारा ट्रेडिंग रणनीति के तौर पर उपयोग किए जाते है׀
  • एक गैप तब बनता है जब पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस और अगले दिन के ओपनिंग प्राइस में अलग-अलग प्राइस लेवल होता है׀
  • गैप को कॉमन गैप, ब्रेकअवे गैप, एग्जॉशन गैप और रनअवे गैप में वर्गीकृत किया जा सकता है׀
  • ट्रेडर्स बनने वाले गैप के प्रकार के आधार पर ट्रेडिंग रणनीति बना सकते है׀

क्या आपने कभी पिछले दिन के ओपनिंग प्राइस और क्लोजिंग प्राइस के बीच में एक ब्रेक देखा है?

यदि हां, तो इन दो ट्रेडिंग सेशन के बीच के ब्रेक को Price Gaps के रूप में जाना जाता है׀

गैप सामान्य पैटर्न होते हैं जो डे ट्रेडर्स और पोजीशनल ट्रेडर्स दोनों के ही द्वारा ट्रेडिंग रणनीति के तौर पर उपयोग किये जाते है׀

इस ब्लॉग में, हम गैप की मूल बातों के साथ-साथ आमतौर पर ट्रेडिंग में उपयोग किये जाने वाले 4 प्रकार के गैप के बारे में चर्चा करेंगे׀

Price Gaps क्या होता हैं?

एक गैप तब बनता है जब पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस और अगले दिन के ओपनिंग प्राइस में अलग-अलग प्राइस लेवल होता है׀

यह गैप मुख्य रूप से ट्रेडिंग सेशन के बाद उस एक विशेष स्टॉक में किसी भी समाचार के कारण बनता है

उदाहरण के लिए, यदि कंपनी की कमाई उम्मीद से अधिक है, तो अगले दिन स्टॉक की गैप बढ़ जाएगी׀

एक Price Gap क्यों बनता हैं?

एक गैप आमतौर पर तब बनता है जब मार्केट में लिक्विडिटी कम होती है׀ उस स्टॉक का ट्रेड करने के लिए पर्याप्त खरीदार या विक्रेता नहीं होते है׀

यह तब भी हो सकता है जब उस स्टॉक में हाई वॉल्यूम होता है׀

अर्निंग रिलीज़ होने और कंपनी से सम्बंधित समाचारों जैसे महत्वपूर्ण इवेंट जो स्टॉक के क्लोज होने के बाद बाज़ार के सेंटिमेंट को प्रभावित करते है, जब स्टॉक अगले दिन खुलता है तो ये स्टॉक की कीमतों में गैप बनने का नेतृत्व करते हैं׀

4 प्रकार के Price Gaps:

Price Gaps को मुख्य रूप से 4 समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

price-gaps

1. कॉमन Price Gaps:

कॉमन गैप को कभी-कभी ट्रेडिंग गैप या एरिया गैप भी कहा जाता है׀

यह गैप नर्वस मार्केट में होता है और आमतौर पर कुछ दिनों में बंद हो जाता है׀ जब वॉल्यूम कम होता है, तब पूर्व-लाभांश में जाने वाले स्टॉक के कारण यह गैप बन सकता है׀

एक कॉमन गैप एक ट्रेडिंग रेंज में प्रकट होता है और उस समय में स्टॉक में उत्साह की कमी की स्पष्ट पुष्टि करता है׀

इस प्रकार के गैप के बारे में जानना अच्छा है, लेकिन आमतौर पर यह संदेहपूर्ण होता है कि वे ट्रेडिंग अवसरों को उत्पन्न करेंगे׀

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2. ब्रेकअवे Price Gaps:

ब्रेकअवे गैप आमतौर पर शुरू में नहीं भारती हैं׀

एक ब्रेकअवे गैप तब बनता है जब एक स्टॉक गैप की कीमत सपोर्ट या रेजिस्टेंस लेवल से अधिक होता है׀ यह एक ब्रेकआउट पैटर्न की तरह होता है, लेकिन यहाँ वास्तविक ब्रेकआउट एक गैप के रूप में होता है׀

इस तरह के गैप मजबूत गति के संकेत देते है और कीमत एक ब्रेकअवे गैप के बाद ट्रेंड करता रहता है׀

इसके अलावा, ब्रेकअवे गैप जितना अधिक होगा, गैप के बाद की कैंडल उतनी ही मजबूत होगी, और प्रचलित ट्रेंड भी उतना ही मजबूत होगा׀

3. रनअवे/ कंटिन्यूएशन Price Gaps:

रनअवे गैप को मेजरिंग गैप के रूप में भी संदर्भित किया जाता है׀

एक अपट्रेंड में रनअवे गैप उन ट्रेडर्स को प्रदर्शित करता है जो अपट्रेंड की शुरुआत के दौरान ट्रेड में अन्दर नहीं आये थे और कीमत में एक रिट्रेसमेंट की प्रतीक्षा करते समय, वे यह तय करते है कि यह होने वाला ही नहीं था׀

वहां अचानक खरीदी की रूचि में वृद्धि हुई है׀ इस प्रकार का रनअवे गैप ट्रेडर्स में लगभग पैनिक स्थिति को प्रदर्शित करता है׀

रनअवे गैप महत्वपूर्ण समाचार इवेंट के कारण भी हो सकते है एक Price Gap क्यों बनता हैं जो स्टॉक में नयी रूचि को उत्पन्न कर सकते है׀

एक डाउनट्रेंड में, रनअवे खरीदारों के द्वारा स्टॉक के लिक्विडेशन में वृद्धि को प्रदर्शित करता है जो कि किनारे पर खड़े होते हैं׀

निफ्टी के दैनिक चार्ट में हम रनअवे गैप का एक उदाहरण देख सकते है:

runaway price gaps

4. एग्जॉशन Price Gaps:

एग्जॉशन गैप आमतौर पर भर जाते है और एग्जॉशन गैप को ट्रेड करने का सबसे अच्छा तरीका अटकले लगाना नहीं बल्कि पैटर्न के आसपास सही एंट्री और एग्जिट टाइम की जानकारियों का उपयोग करना है׀

एक एग्जॉशन गैप आमतौर पर एक ट्रेंड के अंत में या एक महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर बनता है׀

ट्रेंड की दिशा में पहला गैप एक रनअवे गैप की तरह लग सकता है लेकिन दी हुई कैंडल आमतौर पर एक दोजी पैटर्न के बाद होता है जो प्राइस लेवल की अनिर्णय या अस्वीकृति को दर्शाता है׀

हम नीचे दिए गए निफ्टी के दैनिक चार्ट में एग्जॉशन गैप का एक उदाहरण देख सकते हैं:

exhausion gap

गैप के साथ खेलना:

ट्रेडर्स बनने वाले गैप के प्रकार के आधार पर ट्रेडिंग रणनीति बना सकते है׀

थम्ब रूल के अनुसार, नीचे कुछ बिंदु दिए गए है जिन पर ट्रेडर्स को विचार करने की आवश्यकता है जब ट्रेडिंग गैप:

  • कॉमन गैप को आमतौर पर विपरीत दिशा में ट्रेड करना चाहिए, क्योंकि बाज़ार में गैप होने के बाद वे भर जाते है׀
  • कंटिन्यूएशन गैप एक मजबूत ट्रेंड का सिग्नल देता है, और एक कंटिन्यूएशन गैप होने के बाद ट्रेडर्स ट्रेंड की दिशा में एंट्री कर सकते है׀
  • एग्जॉशन गैप ट्रेंड रिवर्सल का सिग्नल देता है और ट्रेडर्स को इस गैप का पता लगने के बाद विपरीत ट्रेंड में एंट्री करनी चाहिए׀

ऊपर दिए गए थम्ब रूल्स की मदद से, दोनों डे ट्रेडर्स और पोजीशनल ट्रेडर्स चार्ट में गैप का एनालिसिस कर सकते है और इसके अनुसार ट्रेड कर सकते है׀

आप स्टॉकएज एप, जो वेब वर्जन में भी उपलब्ध है, का उपयोग करके अगले दिन ट्रेडिंग के लिए, स्टॉक को फ़िल्टर करने के लिए टेक्निकल स्कैन का उपयोग कर सकते है׀

नीचे कमेंट करके बताएं की क्या आपको यह प्राइस पैटर्न इंट्रेस्टिंग लगा׀

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गैप ट्रेडिंग रणनीति – टेक्निकल एनालिसिस में गैप थ्योरी को कैसे लागू करें

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Diastema: दांतों के बीच गैप होने की ये है 4 प्रमुख वजह, डेंटिस्ट से जानिए उपचार का प्राकृतिक और वैज्ञानिक तरीका

दांतो के बीच में गैप होना एक आम समस्या है, जिसके कई कारण हो सकते हैं। यह बच्चों और बड़ों दोनों को हो सकता है। इसके बारे में विस्तार से समझने के लिए हमने बात की डॉ नम्रता रूपानी से; जिन्होंने डायस्‍टेमा (दांतों के बीच गैप) के बारे में हमें विस्तार से जानकारी दी है।

Written by Atul Modi | Updated : July 12, 2021 4:30 PM IST

अक्सर आपने देखा होगा की बच्चों और बड़ों के दांतों के बीच में काफी गैप (Danto Ke Beech Gap) बन जाते हैं यानी दो दांतों के बीच में फासला बढ़ जाता है, जो चेहरे की खूबसूरती को बिगाड़ देता है। दांतों में गैप (Diastema) होने के कई कारण होते हैं जैसे मसूड़ों के रोग और बचपन की बुरी आदतें आदि। हालांकि इसे ठीक भी किया जा सकता है।

दरअसल, आजकल ओरल हाइजीन पर जागरूकता बढ़ने के साथ, डायस्‍टेमा (दांतों के बीच मौजूद गैप्‍स) जैसी दांतों की समस्‍याओं पर भी प्रमुखता से ध्‍यान दिया जाने लगा है। लोग दांतों की खराबियों को क्‍या समझते हैं, इस पर भी धारणाएं बन रही हैं। डायस्‍टेमा आपके दांतों के बीच के गैप्‍स (रिक्‍तता) का दूसरा नाम है। वर्ष 2012 में हुआ एक अध्‍ययन पुराने परिणामों की पुष्टि करता है कि डायस्‍टेमा लगभग दो-तिहाई बच्‍चों में हो सकता है, जिनके ऊपरी जबड़े के सामने के दो सपाट दांत निकल आये हों।

डायस्‍टेमा या दांतों के बीच गैप होने के कारण - Diastema Cusess In Hindi

आइये, हम डायस्‍टेमा के कुछ आम कारणों पर नजर डालें।

1. असामान्‍य वृद्धि

ज्‍यादातर मामलों में, डायस्‍टेमा तब होता है, जब दांतों के बीच सामान्‍य वृद्धि में रूकावट आती है और कैनाइन बनने तक एक खालीपन आ जाता है। ऐसे मामले भी हैं, जिनमें दांतों की असामान्‍य स्थिति और आकृति तथा आकारों में अंतर से दांत प्रभावित होते हैं और धीरे-धीरे एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं।

2. मसूड़ों के रोग

मसूड़ों के रोग से भी डायस्‍टेमा हो सकता है, क्‍योंकि वह दांतों को सहारा देने वाले टिश्‍यूज और हड्डियों को क्षतिग्रस्‍त कर देता है। पेरियोडोंटिटिस से दांत ढीले हो सकते हैं और दांतों के बीच खालीपन आ सकता है। मसूड़ों के रोगों के आम लक्षणों में से कुछ हैं मसूड़ों में सूजन, मसूड़ों से खून आना, चबाते समय दर्द होना, दांत ढीले होना और सांसों की दुर्गंध।

3. फ्रेनम टिश्‍यूज की भूमिका

लैबियल फ्रेनम एक टिश्‍यू है, जो ऊपरी होंठ के भीतर से आगे के दांतों के ऊपर मसूड़े तक जाता है। आपके ऊपरी आगे के दांतों और मसूड़े की रेखा के बीच एक बड़े लैबियल फ्रेनम टिश्‍यू की मौजूदगी से भी आपके दांतों के बीच खालीपन आ सकता है। डायस्‍टेमा तब बन सकता है, अगर वहां अतिरिक्‍त दांत हैं या बेबी टीथ नहीं गिरे हैं।

4. बचपन की आदतें

बचपन में पड़ी कुछ आदतें भी दांतों के बीच खालीपन ला सकती हैं । यह आदतें हैं अंगूठा या उंगली चूसना, या ऊपर और नीचे के दांतों के बीच कोई धातु, लकड़ी या किसी अन्‍य कठोर चीज का टुकड़ा डालना। ऐसी आदतों से दांतों पर अनावश्‍यक दबाव आता है और उन्‍हें नुकसान पहुंचता है और वे एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं। डायस्‍टेमा ऊपर या नीचे के सामने वाले दांतों पर ज्‍यादा दबाव डालने वाली अंगूठे की हरकत से भी हो सकता है। जीभ के इस दबाव (टंग प्रेशर) को जीभ का धक्‍का (टंग थ्रस्‍ट) भी कहा जाता है और यह दांतों के बीच खालीपन ला सकता है।

डायस्‍टेमा या दांतों में गैप का इलाज - Daanto ke Beech Gap Ka Ilaj Hindi

डायस्‍टेमा के कारणों की तरह, अधिकांश मामलों में इसका इलाज भी चुनौती वाला नहीं होता है। कई लोग इस खालीपन को कॉस्‍मेटिक की नजर से देखते हैं। हालांकि, दांतों के बीच खालीपन को रोकना और अच्‍छी आदतें डालना ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है, ताकि आपके ओरल हेल्‍थ को मजबूती मिले। आइये, हम डायस्‍टेमा को ठीक करने के लिये उपलब्‍ध इलाजों पर सरसरी तौर से नजर दौड़ाएं।

A. प्राकृतिक रूप से गैप्‍स का भरना

दांतों के बीच एक Price Gap क्यों बनता हैं गैप्‍स को भरने की संभावना ज्‍यादा प्राकृतिक होती है, यदि यह गैप 2 मिलीमीटर से कम हो। हालांकि, यदि गैप 2 मिलीमीटर से ज्‍यादा है, तो ज्‍यादा उन्‍नत तरीकों को अपनाया जा सकता है। बच्‍चों को उंगली या बाहरी चीजें चूसने से रोकना आगे के दांतों की लाइनिंग पर गैर-जरूरी दबाव पड़ने से बचाने में मदद करता है।

B. ब्रेसिज

डायस्‍टेमा को ठीक करने के सबसे आम और स्‍वीकृत तरीकों में से एक है ब्रेसिज। ब्रेसिज में एप्‍लीकेटर्स का इस्‍तेमाल होता है, जैसे ब्रेकेट्स, वायर्स और स्‍ट्रेंथ बैण्‍ड्स, जो दांतों को सही ढंग से खिसकाते और बैठाते हैं। सही स्थिति में नहीं आने तक धीरे-धीरे दबाव डाला जाता है। कुछ मामलों में परमानेंट रिटेनर जरूरी हो सकता है, यदि रिटेनर हटाने के बाद भी दाँत हिलता रहे।

C. प्रोथेसेस और रेजिन्‍स

परमानेंट या रिमूवेबल इंप्‍लांट्स, क्राउंस या वेनीर्स (डायरेक्‍ट बॉन्‍डेड या सिरेमिक) का इस्‍तेमाल भी दांतों के बीच खालीपन को कवर करने में किया जा सकता है। आमतौर पर यह विधि ऑर्थोडोंटिक ट्रीटमेंट के फॉलो-अप के एक Price Gap क्यों बनता हैं रूप में अपनाई जाती है। लंबे समय तक काम आने वाली एक अन्‍य विधि भी है, जिसमें खालीपन को भरने के लिये कम्‍पोजिट रेजिन्‍स या डेंटल बॉन्‍डींग मटेरियल्‍स का इस्‍तेमाल होता है, जो प्राकृतिक दाँत जैसे दिखते हैं।

D. मसूड़ों के रोगों को ठीक करना

अगर मसूड़े के किसी रोग के कारण दांतों के बीच खालीपन आता है, तो डेंटिस्‍ट के साथ अपॉइंटमेंट जरूरी हो जाता है और उस रोग को जल्‍दी से जल्‍दी ठीक करने की जरूरत होती है। डेंटिस्‍ट द्वारा रोग की पहचान के बाद उसे ठीक करने की विधि का निर्णय होगा। अगर मसूड़े का रोग बहुत उन्‍नत अवस्‍था में नहीं है, तो डेंटिस्‍ट कम कठिन उपायों और उपचारों की अनुशंसा कर सकता है। अगर मसूड़े का रोग बैक्‍टीरिया के संक्रमण से हुआ है, तो डेंटिस्‍ट तेज और आसान उपचार के लिये एंटीबायोटिक्‍स की अनुशंसा कर सकता है। ओरल एंटीबायोटिक्‍स भी कुल्‍ला करने वाली उन दवाइयों या जेल्‍स की तरह मदद कर सकते हैं, जिन्‍हें दांतों और मसूड़ों के बीच डाला जाता है।

E. फ्लैप सर्जरी से स्‍केलिंग और रूट प्‍लानिंग

स्‍केलिंग एक अन्‍य विधि है, जिसमें बैक्‍टीरिया को आपके दांतों और मसूड़ों से हटाया जाता है, जबकि रूट प्‍लानिंग में डेंटिस्‍ट आपके दांतों की जड़ की सतहों को चिकना कर देता है। इस प्रकार दांतों को बैक्‍टीरिया और टार्टर (दांतों का मैल) के जमने से सुरक्षा मिलती है। फ्लैप सर्जरी में छोटे चीरे लगाकर मसूड़े का एक छोटा भाग निकालने से स्‍केलिंग और रूट प्‍लानिंग की प्रक्रिया में सहायता मिलती है, क्‍योंकि इसमें जड़े स्‍पष्‍ट दिखती हैं और लंबे समय के परिणाम देने वाला उपचार प्रभावी ढंग से पूरा किया जाता है।

F. स्टिम्‍युलेटिंग जेल्‍स

दांतों की रोगग्रस्‍त जड़ों पर टिश्‍यू स्टिम्‍युलेटिंग जेल्‍स लगाने से ठीक होने और क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यह जेल्‍स प्रभावित एरिया में स्‍वस्‍थ हड्डी और टिश्‍यूज के विकास को बढ़ावा देते हैं।

G. हड्डी और सॉफ्ट टिश्‍यू की ग्राफ्टिंग

मसूड़ों के रोग डायस्‍टेमा की चुनौती को और गंभीर बना देते हैं और इसलिये, रोग को ठीक करने की उन्‍नत विधियाँ जरूरी हो जाती हैं। हड्डी की ग्राफ्टिंग तब जरूरी होगी, जब रोग हड्डी के घिराव को नष्‍ट कर देगा। जड़ों को कवर करने के लिये मुख के ऊपरी भाग से सॉफ्ट टिश्‍यूज निकाले जाएंगे और मध्‍यवर्ती चरण के तौर पर क्षतिग्रस्‍त टिश्‍यूज को मजबूत बनाया जाएगा।

H. सर्जरी

अगर खालीपन का कारण बड़ा फ्रेनम या सिस्‍ट की मौजूदगी है, तो सर्जरी की जरूरत होगी। सर्जरी के बाद ऑर्थोडोंटिक ट्रीटमेंट बढ़ाया जा सकता है। यह ध्‍यान रखना महत्‍वपूर्ण है कि डायस्‍टेमा को भरने के लिये सर्जरी प्राकृतिक उपचारों से बेहतर होगी।

डायस्‍टेमा का उपचार उचित रूप से सकारात्‍मक है और उपरोक्‍त विधियों की सफलता दर अच्‍छी है। डायस्‍टेमा का इलाज तो हो ही सकता है, लेकिन अच्‍छी ओरल हाइजीन रखकर बच्‍चों और वयस्‍कों में इसकी रोकथाम की जा सकती है। डेंटिस्‍ट को नियमित तौर पर दिखाने से डायस्‍टेमा के शुरूआती लक्षणों की पहचान और स्‍वस्‍थ दांतों तथा मसूड़ों के लिये पर्याप्‍त सहायता लेने में मदद मिल सकती है।

इनपुट्स: डॉ. नम्रता रूपानी, दंत रोग विशेषज्ञ और फाउंडर व सीईओ, कैप्‍चर लाइफ डेंटल केयर।

एक इंजेक्शन और तीन महीने तक गर्भ से छुट्टी

सांकेतिक तस्वीर

"बिस्तर पर लेटे मेरे पति जब भी मुझे गर्भ निरोधक गोली लेते हुए देखते हैं, उनकी आंखों में संदेह तैर जाता है. उनकी आंखों का संदेह कहीं न कहीं उनकी दिलचस्पी पर भी असर डालता है और उनके इस बर्ताव से मैं भी सोच में डूब जाती हूं."

हर रात डिम्पी को होने वाले इस एहसास में एक दर्द भी है और एक सवाल भी.

ये सवाल वो अपने आप से पूछती थी. क्या गर्भधारण के लिए वो तैयार है?

उसकी पिछले साल नई-नई शादी हुई है. लेकिन कुछ ही महीने बाद उसे लगने लगा है कि अगर ख़ुशहाल जीवन के लिए सेक्स अहम है तो गर्भनिरोधक का इस्तेमाल कहीं न कहीं उसे प्रभावित तो करता है ही.

इसी उधेड़बुन में डिम्पी ने गाइनोकॉलजिस्ट से सम्पर्क किया. वहां उसे महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गर्भनिरोधक इंजेक्शन के बारे में पता चला.

क्या है गर्भ निरोधक इंजेक्शन?

महिलाएं गर्भ धारण से बचने के लिए हर तीन महीने में इसका इस्तेमाल कर सकती हैं.

इसका नाम DMPA इंजेक्शन है.

DMPA का मतलब है डिपो मेड्रोक्सी प्रोजेस्ट्रॉन एसीटेट.

यानी इस इंजेक्शन में हॉर्मोन प्रोजेस्ट्रॉन का इस्तेमाल किया जाता है.

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गाइनोकॉलजिस्ट (स्त्री रोग) डॉ. बसब मुखर्जी के मुताबिक ये इंजेक्शन तीन तरीके से काम करता है.

सबसे पहले इंजेक्शन का असर महिला के शरीर में बनने वाले अंडाणु पर पड़ता है. फिर बच्चेदानी के मुंह पर एक दीवार बना देता है जिससे महिला के शरीर में शुक्राणु का प्रवेश मुश्किल हो जाता है. इन दोनों वजहों से बच्चा महिला के शरीर में ठहर नहीं पाता.

इसकी कीमत 50 रुपए से लेकर 250 रुपए तक है.

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गर्भ निरोधक इंजेक्शन से जुड़ी ग़लतफ़हमियां

दुनिया के दूसरे देशों में इसका इस्तेमाल बहुत सालों से चल रहा है. भारत में भी 90 के दशक में इसके इस्तेमाल की इज़ाजत मिल गई थी.

इसके बाद भी भारत सरकार के परिवार नियोजन के लिए दिए जाने वाले किट में इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा था.

वजह? इसके इस्तेमाल को लेकर मौजूद ग़लतफ़हमी.

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गर्भ निरोधक इंजेक्शन के इस्तेमाल से महिलाओं में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है. ऐसी ग़लतफ़हमियों की वजह से महिलाएं इससे बचती थीं.

लेकिन डब्लूएचओ की रिपोर्ट ने इस तरह की ग़लतफ़हमियों पर से पर्दा उठा दिया.

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के हवाला देते हुए डॉ. रवि आंनद कहती हैं, "महिलाओं में इंजेक्शन के लंबे इस्तेमाल से एक Price Gap क्यों बनता हैं हड्डियां कमज़ोर होती हैं. ये बात सही है, लेकिन इसका इस्तेमाल बंद करते ही वापस सामान्य हो जाती हैं."

इतना ही नहीं डॉ. रवि आंनद के मुताबिक इससे महिलाओं में कैंसर का ख़तरा भी कम हो जाता है.

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गर्भ निरोध इंजेक्शन के फ़ायदे

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ बसब मुखर्जी के मुताबिक गर्भ निरोधक इंजेक्शन के इस्तेमाल के कई फ़ायदे हैं.

इसको गोली की तरह हर ऱोज लेने की झंझट नहीं है.

इसको इस्तेमाल करने से गर्भ धारण करने का ख़तरा न के बराबर है.

बच्चा होने के तुरंत बाद भी इसका इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है क्योंकि इसमें प्रोजेस्ट्रॉन होता है.

कुछ लोग ज गर्भ निरोधक के इस्तेमाल को प्राइवेट रखना चाहते हैं, वो इस तरीके को ज़्यादा बेहतर मानते हैं.

इंजेक्शन के इस्तेमाल के बाद कुछ महिलाओं में ब्लीडिंग बहुत कम हो जाती है. डॉक्टर इसे अच्छा मानते हैं क्योंकि इससे महिलाओं में एनीमिया का ख़तरा कम हो जाता है.

सबसे अहम बात ये कि गर्भनिरोधक इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में गर्भ धारण करने की संभावना न के बराबर है.

इतना ही नहीं इसमें समय सीमा का बहुत ज़्यादा बंधन भी नहीं हैं. तीन महीने पूरे होने के चार हफ्ते बाद तक इसे लिया जा सकता. बीच में गर्भधारण का ख़तरा भी नहीं होता.

गर्भनिरोक इंजेक्शन और प्रजनन दर

नेशनल फ़ैमली हेल्थ सर्वे-4 के आंकड़ों के मुताबिक देश में 145 ज़िले ऐसे हैं जहां प्रजनन दर यानी महिलाओं में बच्चा पैदा करने की दर तीन या उससे ज़्यादा है.

मतलब ये कि देश के 145 ज़िलों में महिलाएं तीन से ज़्यादा बच्चे पैदा करती हैं जो कि 'हम दो हमारे दो' की पॉलिसी के ख़िलाफ़ है.

ये 145 ज़िले देश के सात राज्यों में है. ये राज्य हैं बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, झारखंड, और छत्तीसगढ़.

इसलिए केन्द्र सरकार ने इन राज्यों में मुफ्त में बांटे जाने वाले गर्भ निरोधक किट में इंजेक्शन वाले गर्भनिरोध को डाला है.

रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं में इस्तेमाल होने वाले एक Price Gap क्यों बनता हैं गर्भनिरोधक इंजेक्शन की सफलता की दर 99.7 फ़ीसदी है.

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Recessionary Gap क्या है?

मंदी की खाई क्या है? [What is the recession gap? In Hindi]

एक मंदी (Recession) का अंतर इंगित करता है कि अर्थव्यवस्था पूर्ण-रोजगार स्तर से नीचे चल रही है, इस प्रकार दीर्घावधि में सामान्य मूल्य स्तर को नीचे धकेलती है। इस अंतर का मुख्य कारण अकुशल संसाधन आवंटन (inefficient resource allocation) है जो अल्पावधि में मूल्य कठोरता का कारण बनता है। विशेष रूप से, मजदूरी को अक्षम रूप से आवंटित किया जाता है, इस प्रकार अर्थव्यवस्था में मंदी (Recession) का कारण बनता है क्योंकि फर्मों का मुनाफा कम होता है और वे अधिक श्रमिकों को बंद करने के लिए मजबूर होते हैं।

मंदी की खाई की परिभाषा [Definition of recession gap] [In Hindi]

Recession Gap, जिसे संकुचन अंतराल के रूप में भी जाना जाता है, वास्तविक जीडीपी और संभावित जीपीडी के बीच का अंतर है। संभावित सकल घरेलू उत्पाद वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद से अधिक है क्योंकि अर्थव्यवस्था का कुल उत्पादन पूर्ण रोजगार पर उत्पादित कुल उत्पादन से कम है।

Recessionary Gap क्या है?

Recession gap को Contraction interval भी कहा जाता है। एक अर्थव्यवस्था आवश्यक रूप से पूर्ण रोजगार स्तर पर संचालित नहीं होती है। तो संभावित पूर्ण रोजगार संतुलन और वास्तविक लोगों के बीच मौजूद अंतर Recession gap है।

यह Recession Gap लंबी अवधि में कीमतों को नीचे धकेलती है। मंदी आर्थिक गतिविधियों में एक सामान्य मंदी को संदर्भित करती है, अर्थात एक व्यापार चक्र संकुचन (Business cycle contraction)।

आम तौर पर, एक Recession gap तब होती है जब कोई अर्थव्यवस्था मंदी के करीब पहुंच रही होती है। तो यह व्यापार चक्र संकुचन से भी जुड़ा है। Real Gross Domestic Product (Real GDP) क्या है?

मंदी की खाई का क्या कारण है? [What is the reason for the recession gap? In Hindi]

यह किसी देश की अर्थव्यवस्था में वास्तविक और संभावित उत्पादन के बीच का अंतर है जो इस अंतर का कारण बनता है। जब वास्तविक उत्पादन संभावित उत्पादन से कम होता है, तो लंबी अवधि में कीमतों पर नीचे की ओर दबाव डाला जाता है। इन अंतरालों को तब देखा जा सकता है जब देश में उच्च बेरोजगारी हो। एक साथ महीनों तक आर्थिक गतिविधियों में कमी मंदी का संकेत देती है और इस दौरान कंपनियां अपने खर्च में कटौती करेंगी। इससे व्यापार चक्र में गैप बनता है। जब मंदी आने वाली होती है, तो कर्मचारियों के लिए टेक-होम वेतन में कमी और उच्च बेरोजगारी के कारण उपभोक्ता खर्च कम हो जाता है।

कमर, कूल्हे में बना रहता हो दर्द तो आपको हो सकती है ये गंभीर बीमारी!

अगर आपको कमर और कूल्‍हे में लंबे समय तक दर्द बना रहता हो तो आप एक गंभीर बीमारी से ग्रस्‍त हो सकते हैं.

Published: May 6, 2019 10:56 AM IST

कमर, कूल्हे में बना रहता हो दर्द तो आपको हो सकती है ये गंभीर बीमारी!

अगर आपको कमर और कूल्‍हे में लंबे समय तक दर्द बना रहता हो तो आप एक गंभीर बीमारी से ग्रस्‍त हो सकते हैं. ये बीमारी ऐसी है जो आगे जाकर काफी परेशान कर सकती है.

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इसका नाम है एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस. ये एक इंफ्लेमेटरी और ऑटोइम्यून बीमारी है. ये मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है और इसके परिणामस्वरूप कमर, पेल्विस और नितंबों में दर्द होता है.

कुछ समय पहले एक शोध हुआ था. जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए थे. शोध के अनुसार, इस बीमारी की पहचान होने में आमतौर पर औसतन 7 से 10 साल की देरी होती है. इस बीमारी के शुरुआती चरण में, मरीज को अक्सर कमर दर्द की शिकायत रहती है और इससे बीमारी का पता लगने में देरी होती है. कई बार मरीजों को इस बारे में पता नहीं होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रीढ़ की हड्डियों के दर्द की शिकायत होने पर रूमेटोलॉजिस्ट की सलाह लेनी चाहिए.

इस बीमारी में विशेषज्ञ एनएसएआईडी (नॉन स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेंटरी दवाएं) लेने की सलाह दे सकते हैं. इसके बाद रोग में सुधार वाली दवाएं या टीएनएफ ब्लॉकर्स जैसी बायोलॉजिक्स दे सकते हैं.

मुंबई स्थित क्वेस्ट क्लीनिक के चिकित्सक डॉ. सुशांत शिंदे ने कहा, ‘रूमेटोलॉजिस्ट एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होता है. इसलिए रूमेटोलॉजिस्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए’.

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एम्स) के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दानवीर भादू ने कहा, ‘एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से शरीर में कमजोरी आती है. बायोलॉजिक थेरेपी से शरीर की संरचनात्मक प्रक्रिया में नुकसान को कम किया जा सकता है. इससे और मरीजों को चलने-फिरने होने वाली तकलीफ से निजात मिल सकती है’.

क्‍या करें क्‍या नहीं

– सुबह के समय कमर, पेल्विस तथा नितंबों का सख्त हो जाना इस रोग के मुख्य लक्षण हैं, लेकिन सही तरीके से व्यायाम करने से आराम मिल सकता है. व्यायाम शुरू करने से पहले फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लाभदायक हो सकता है.

– पीठ के बल सख्त गद्दे पर सोने से भी लाभ मिल सकता है. घुटनों या सिर के तकिया नहीं लेना चाहिए.

– चिकित्सकों के अनुसार, गुनगुने पानी से नहाने से एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के दर्द और कड़कपन में काफी राहत मिलने में मदद मिलती है. गुनगुने पानी से स्नान के बाद स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना दर्द और कड़कपन को दूर करने के लिए अच्छा होता है. दर्द से राहत पाने का अन्य प्राकृतिक तरीका है – दर्द वाले स्थान और शरीर के हिस्सों पर हॉट और कोल्ड सिकाई.

– मसाज करवाने से भी आराम मिलता है. एक्यूपंचर थेरेपी से शरीर के दर्द से राहत दिलाने वाले हॉर्मोन्स सक्रिय हो जाते हैं. हालांकि, मसाज थेरेपी के लिए फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना जरूरी है.

– चिकित्सकों का कहना है कि धूम्रपान करने वालों को, खासतौर से पुरुषों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है. धू्म्रपान बंद करने से सेहत में सुधार होता है.
(एजेंसी से इनपुट)

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